Presence (Ramayana) & absence (Mahabharata) of Pole Star – Implication for Chronology

Shrimati Rupa Bhaty provides summary of the issue, succinctly, in her short note, below

महाभारत काल के विषय मे चिन्ता की तब ये सामने बात आयी कि अरुन्धती आगे क्यों आ गयीं और ध्रुव तारा सिर्फ़ ध्यान मे ही क्योंकर रहा। अगर अरुन्धती ही आगे हो कर सप्तऋषिओं को खीच रही थीं मगर किसके इर्द गिर्द खींच रही थी और ध्रुव तारे का कहीं भी उल्लेख नहीं होना, फिर ये ३१०० बी सी इत्यादि वर्ष विद्वानों द्वारा कैसे सामने लाये गये जबकी इस समय मे शिशुमार का एक तारा स्पष्ट रूप मे ध्रुव तारा था जिसका उल्लेख महाभारत मे कहीं भी नहीं है। व्यास शिशुमार का उल्लेख न करें ऐसा हो नहीं सकता…सभी प्रकाण्ड पण्डित आश्चर्यजनक रूप से रामायण और महाभारत कि देटिन्ग कर रहे हैं। रामायण मे ध्रुव तारे का उल्लेख है तो बिना ध्रुव तारे की डेट बता रहे हैं और महाभारत मे जब ध्रुव तारे का उल्लेख नहीं है तब जबरन हि शिशुमार क समय निर्धारित कर रहे हैं। कमाल ही है इस देश के indologists का. The best nearest is Nilesh Nilkanth Oak ji’s approach. Do read his blogs while he also doesn’t know much sanskrit like me.

जब तक मत्स्य की आँख नहीं दिखेगी तब तक सभी हवा मे ही तीर चलायेंगे… archeo-astronomy इस देश मे nacent stage मे है. इस देश मे पहले विद्वान पक्का तो करें कि क्या किसपे दृढ़ करना है.

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